वायरिंग करने से पहले निम्नलिखित समान्य नियमों को ध्यान में रखकर ही वायरिंग करना चाहिए।
(1) (ISI) भारतीय मानक संस्थान के अनुसार किसी भी सर्किट में लाइट का लोड 800 वाट से 1000 वाट तक होता अर्थात प्रत्येक लाइट को मिलाकर 10 प्वाइंट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(2) किसी भी सर्किट में पावर का अधिकतम लोड दो किलो वाट या दो प्वाइंट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(3) लाईट और पावर वायरिंग अलग - अलग करनी चाहिए।
(4) वायरिंग कम्प्लीट होने के बाद उसे अर्थ से अवश्य कनेक्ट करे अर्थात आर्थिंग अवश्य करना चाहिए।
(5) वायरिंग में प्रयोग होने वाली सामग्री के करंट रेटिंग सर्किट के लोड के अनुसार होना चाहिए।
(6) वायरिंग में प्रयोग होने वाले कन्ट्रोलींग बोर्ड की उंचाई लगभग पाँच फुट होना चाहिए।
(7) लाईट एवं पंखा की ऊंचाई जमीन से आठ या नौ फुट की होनी चाहिए।
(8) वायरिंग पूर्ण होने जाने के बाद सप्लाई देने से पहले लीकेज की जांच कर लेना चाहिए।
(9) medium और हाई voltage पर कार्य करने वाली सभी मशीनों को डबल आर्थिंग करना चाहिए।
(10) वायरिंग के नियम अनुसार फेज वायर को हमेशा fuse एवं switch के द्वारा कन्ट्रोल करना चाहिए। और न्यूट्रल वायर को न्यूट्रल लिंक के द्वारा लेजाना चाहिए।
(11) आर्थिंग करते समय भूमि का अर्थ प्रतिरोध मैदान क्षेत्र में एक से तीन ओम तथा पहाड़ी एवं रेतीली क्षेत्रों में सात ओम तक होना चाहिए। जिससे अर्थ लीकेज के समय वायरिंग स्थापना को कोई नुकसान न पहुंचा सके।
(12) वायरिंग करते समय DC सप्लाई के पोजिटिव और निगेटिव वायर को क्रमशः लाल एवं नीले रंग से दर्शाना चाहिए।
(13) तीन फेज के वायरिंग करते समय फेज रंग लाल, पीला तथा नीला रंग से और न्यूट्रल को काला रंग से दर्शाना चाहिए। और कोशिश कीजिए कि प्रत्येक फेज पर बराबर लोड देना चाहिए।
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